रूबरू | Part 26 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
आकिल की मंगेतर से बात हुई? दादी ने बात बदल दी।
राहुल की बात हुई थी उससे। पैसा लेने को तैयार नहीं है।
पैसा ले लेती तो अच्छा रहता। अब क्या होगा?
दादी को फिक्र हुई।
उसकी शर्त मान ली। ताबिश सुकून से बोला।
कौन सी शर्त?... दानिश से मिलने वाली...दादी परेशान हुई।
हां...
लेकिन दानिश कैसे?...दादी के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं।
मैं जाऊंगा मिलने। ताबिश ने दादी की ओर देखा।
लेकिन उसे तो दानिश से मिलना था...दादी की परेशानी बढ़ती जा रही थी।
उसे क्या पता कि मैं दानिश हूं या ताबिश...
आज के ज़माने में ऐसे भी लोग हैं जिन्हें पैसों से ज़्यादा इंसान अज़ीज़ हैं। ताबिश दादी की ओर देखता है।
यह बात तो तुम सही कह रहे हो। दौलत देखकर तो किसी का भी मन बदल जाता। लेकिन उसे पैसे से कोई मतलब नहीं। दादी ने भी दिल से अशमारा की तारीफ की।
पहले उसकी ज़िद सुनकर गुस्सा आता था। लेकिन अब पता नहीं क्यों उससे मिलने का दिल कर रहा है। इस लिए उसकी शर्त मान ली।
एक बार मिल कर देखूं तो सही। वह चाहती क्या है?
ताबिश ख्यालों में उसका अक्स बनाता रहा। लेकिन बन न सका।
अगर कोई ऐसी शर्त रख दी जो हम मान न सके तो?...दादी को डर लगा।
आप परेशान न हों...एक बार मिलता हूं। फिर जो होगा देखा जायेगा। ताबिश लापरवाही से बोला।
कब मिलना है?
25 तारिख शाम 5 बजे...
चलो ठीक है फिर... ध्यान से जाना। और कोई ऐसी बात न मानना जो हम पूरी न सकें। दादी का डर जायज़ था।
वह एक ऐसी लड़की से मिलने वाला था। जिसका मंगेतर उनकी वजह से मरा था। और वह भी तब जब उनकी शादी हो रही थी।
क्या नाम था उसका? दादी अचानक नाम याद करने लगीं।अशमारा... ताबिश तुरंत बोला।
वह यह नाम कैसे भूल सकता था।
अशमारा से हर दिन वह मन ही मन बात करता था।
जब से उसने पैसा लेने से मना किया था। तब से कहीं न कहीं वह ताबिश के दिल में धीरे-धीरे जगह बना रही थी।
अक्सर ताबिश सोचता वह कैसी होगी?...
बहुत खूबसूरत होगी...
ज़िद्दी होगी...
गुस्से वाली होगी।
उसकी आंखों में अजीब-अजीब सी शक्लें आती। और फिर वह देर तक उसके बारे में सोचता रहता।
अगर मैं उससे शादी कर लूं?... ताबिश दादी की ओर देखता है।
यह क्या कह रहे हो... तुम उससे कभी मिले भी नहीं। फिर इतना बड़ा फैसला?... दादी बहुत गौर सै उसकी ओर देखती हैं।
जब वह मायरा से इंटरव्यू के वक्त मिली थीं तब उन्होंने उसे इसी लिए सेलेक्ट किया था कि वह उन्हें अपने ताबिश के लिए अच्छी लगी थी।
लेकिन ताबिश का इस तरह अशमारा से शादी का फैसला उन्हें हैरान कर गया।
पहले एक बार अशमारा से मिल लो। फिर बात करते हैं। दादी ने बात खत्म कर दी।
वह अपने पोते को उदास नहीं देखना चाहती थी। लेकिन वह उसे कुर्बान भी नहीं होने देना चाहती थी।
वह नहीं चाहती थी कि आकिल की मौत के बदले वह खुद को उसे सौंप दे।
एक बार ताबिश उससे मिल ले। फिर देखती हूं क्या करना है। वह खुद को तसल्ली देती हैं।
ज़्यादा कुछ सोचने की ज़रूरत नहीं है। जो होगा अच्छा होगा।
दादी उसे उठता देख तसल्ली देती हैं।
अब सोचने के लिए कुछ नहीं बचा दादी। वह उदासी से बोला।
इतना निराश मत हो मेरे बच्चे...सब ठीक हो जायेगा।
दादी की आंखें नम हो गई।
अब ठीक होकर भी ठीक नहीं होगा। ताबिश गोल-मोल जवाब देता है।
उम्मीद बाकी रखो। और जाओ पहले कुछ खा लो। खाली पेट मत सोना। रात का खाना खाना सेहत के लिए अच्छा रहता है। फिर चाहे एक लुकमा (कौर) ही क्यों न खाओ। दादी मुस्कुरा दीं।
हां खा लूंगा आप फिक्र न करें। अब आप सो जाएं।
ताबिश के मन में कुछ ख्याल आया। जिसे सोच कर वह भी मुस्कुरा दिया।
उसे मुस्कराते देख दादी को थोड़ा सुकून मिल गया।
बाहर निकल कर वह मायरा के कमरे की ओर देखता है।
धीमें कदमों से चलते हुए वह उसके दरवाज़े पर खड़ा होकर एक पल सोचता है। फिर दरवाज़ा नॉक करके दरवाज़े का नॉब घुमा कर दरवाज़ा खोलता है।
मायरा जो बेड पर लेटी ताबिश के बारे में सोच रही थी। उसे सामने देखकर उठ कर बैठ गई।
मेरे लिए मैगी बना दो... ताबिश एक पल लिए उसकी गहरी आंखों में खो गया। लेकिन दूसरे ही पल वह संभल गया।
पूरा रेस्टोरेंट खाकर आए हैं...उसके बाद भी भूखे हैं। मायरा धीरे से कहती है।
कुछ कहा तुमने? ताबिश ने बनने की ऐक्टिंग की। जबकि उसने मायरा की बात अच्छे से सुन ली थी।
ताबिश के बगल से निकल कर वह सीधे किचन की ओर बढ़ती है।
उसे इस वक्त ताबिश पर बहुत तेज़ गुस्सा आ रहा था। दो लोगों के लिए पूरा रेस्टोरेंट बुक हो गया। और अभी मैगी खाना बाकी है।
वह मन ही मन सोचती किचन में जाकर मैगी निकालती है।
ताबिश भी किचन में आ गया।
आप क्यों आए हैं?... ताबिश को देखकर उसका पारा हाई हुआ।
कॉफी बनाने...वह फ्रीज खोलकर दूध निकालता है।
गुस्से से भरा उसका अंदाज़... उसे बहुत मज़ा आ रहा था उसका यह रूप देख कर।
वह चुपचाप कॉफी बनाने लगा।
मायरा भी अपना ध्यान मैगी पर देती है।
अचानक मायरा के मन में एक शरारत सूझती है।
मन में आए अपने ख्याल से एक बार उसे डर लगता है। लेकिन दूसरे ही पल वह लाल मिर्च पाउडर और नमक का डिब्बा निकाल कर उसमें दिल खोलकर डालती है।
अपनी इस हरकत पर वह मन ही मन खुद को शाबाशी देती है।
एक बात पूछूं?... ताबिश की नज़र अपनी कॉफी बनाने पर था।
मैं मना कर दूंगी तो कौन सा आप मेरी बात मानने वाले हैं।
मायरा फटाफट सारे डिब्बों को हटाती है।
यह बात भी सही है... ताबिश शेल्फ से दो मग उठाता है।
हां तो मैं कह रहा था कि....
तुम्हें मेरे पूरा रेस्टोरेंट बुक करने पर तकलीफ हुई। या आलिया के साथ जाने से तकलीफ है?
ताबिश का ध्यान अभी भी कॉफी पर था। जो बनकर तैयार हो गई है।
शायद वह जानबूझकर उसकी ओर नहीं देख रहा था।
मुझे किसी बात से तकलीफ नहीं है। आप चाहे जिसके साथ जाएं।
वैसे भी उस छिपकली में है क्या?...
जिससे मुझे उससे तकलीफ होगी।
मायरा प्लेट में मैगी निकाल कर पास रखे टेबल पर रखती है।
छिपकली... ताबिश ज़ोर से हंसता है। मेरे मन में यह नाम कभी क्यों आया।
इसका मतलब तुम उसे मेरे साथ देखकर जल गई। उसकी बात पर ताबिश को हंसी तो बहुत आ रही थी। लेकिन वह सीरियस हो गया।
मैं कौन होती हूं जलने वाली?...
हमारा रिश्ता मालिक और नौकर का है...
यह बात मुझे अच्छे से याद है।
तो इस रिश्ते से जलने या जलाने की कोई बात ही नहीं।
मेरा काम है आपका हुक्म मानना...
उससे ज़्यादा कुछ नहीं।
ताबिश चुपचाप उसे देखता है। और कूकिंग काउंटर से कॉफी का दोनों मग उठा कर टेबल पर रखता है। जिस पर मायरा ने मैगी रखा था। और चेयर पर बैठ जाता है। दूसरी चेयर की तरफ इशारा करके उसे भी बैठने को कहता है।
आप खाएं... वह बाहर की ओर मुड़ी।
यह मेरा हुक्म है... ताबिश का चेहरा सपाट हो गया।
वापस मुड़ कर वह कुर्सी पर बैठ गई। उससे बहस करके कौन सा उसे जीत जाना था।
खाओ...वह मैगी का बाऊल उसकी तरफ करता है।
जारी है...
रूबरू भाग 27
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